ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम: पूरा गाइड (खरीदने से पहले जानें सब कुछ)

kldp0007@gmail.com

August 20, 2025

ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम: पूरा गाइड (खरीदने से पहले जानें सब कुछ)

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August 20, 2025

ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम: पार्ट्स, वायरिंग, इन्वर्टर व पूरी जानकारी

ऑन-ग्रिड सोलर • उपभोक्ता गाइड

बढ़ती बिजली की कीमतों और पर्यावरण संरक्षण के बीच ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम सबसे लोकप्रिय विकल्प है। यह आपके बिल को घटाता है और अतिरिक्त ऊर्जा ग्रिड में भेजने देता है (नेट मीटर के जरिए)। विषयसूचीऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम क्या है?मुख्य पार्ट्सवायरिंग कनेक्शन (फ्लो)क्यों खरीदें?खरीदने से पहले चेकलिस्टअक्सर पूछे जाने वाले सवालनिष्कर्ष

ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम क्या है?

यह सिस्टम सीधे बिजली के डिस्ट्रिब्यूशन ग्रिड (Government Supply) से जुड़ता है:

  • दिन में पैनल धूप से DC बिजली बनाते हैं।
  • इन्वर्टर उसे AC में बदलकर आपके लोड को सप्लाई करता है।
  • अतिरिक्त यूनिट नेट मीटर के माध्यम से ग्रिड में निर्यात होती है।
  • रात/कम धूप में आप ग्रिड से बिजली लेते हैं।

नोट: इसमें बैटरी नहीं होती, इसलिए लागत कम और मेंटेनेंस न्यूनतम रहता है।

3 kw ongrid solar system
3kw ongrid solar system DCR

ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम के मुख्य पार्ट्स

1) सोलर पैनल

Mono PERC, TopCon, Bifacial—धूप को DC बिजली में बदलते हैं। 25 वर्ष तक परफॉर्मेंस वारंटी सामान्य है।

2) ऑन-ग्रिड इन्वर्टर

DC→AC कन्वर्ज़न, ग्रिड सिंक्रोनाइज़ेशन, वाई-फाई/ऐप मॉनिटरिंग। दक्षता ~97% या अधिक देखें।

3) नेट मीटर

डुअल-डायरेक्शन मीटर: आयात/निर्यात यूनिट दर्ज करता है—बिल नेट यूनिट पर बनता है।

4) माउंटिंग स्ट्रक्चर

एल्यूमिनियम/हॉट-डिप गैल्वनाइज़्ड स्टील; सही दिशा (दक्षिण) व एंगल पर इंस्टॉल जरूरी।

5) वायरिंग व केबल्स

UV-प्रोटेक्टेड DC/AC केबल, उपयुक्त क्रॉस-सेक्शन; फायर-रेटेड केबल/कॉनडुइट इस्तेमाल करें।

6) सुरक्षा उपकरण

MCB/MCCB, SPD, DC/AC आइसोलेटर—ओवरलोड, शॉर्ट-सर्किट व सर्ज से सुरक्षा।

7) अर्थिंग सिस्टम

कम से कम 3 अर्थिंग: लाइटनिंग अरेस्टर, इन्वर्टर अर्थिंग, स्ट्रक्चर अर्थिंग—सिस्टम सेफ्टी के लिए अनिवार्य।

वायरिंग कनेक्शन (फ्लो)

पैनल → DC केबल → इन्वर्टर → AC केबल → डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स → नेट मीटर → ग्रिड

  • प्रत्येक DC स्ट्रिंग के लिए अलग DC आइसोलेटर व SPD लगाएँ।
  • AC साइड पर उचित रेटिंग के MCB/MCCB व SPD अनिवार्य रखें।
  • सभी कंपोनेंट्स को समुचित अर्थिंग से जोड़ें।
फ्लो: पैनल → इन्वर्टर → DB → नेट मीटर → ग्रिड (अर्थिंग हर चरण पर)

ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम क्यों खरीदें?

  • बिजली के बिल में 70–100% तक बचत*
  • पैनल पर 25 वर्ष तक परफॉर्मेंस वारंटी
  • लो मेंटेनेंस—बैटरी नहीं
  • सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी (स्थानानुसार)
  • ग्रीन एनर्जी—कार्बन फुटप्रिंट में कमी

*अस्वीकरण: बचत साइट की धूप, छाया, लोड प्रोफाइल, टैरिफ व सिस्टम साइज पर निर्भर करती है।

खरीदने से पहले चेकलिस्ट

  • BIS प्रमाणित, विश्वसनीय ब्रांड के मॉड्यूल चुनें (Mono PERC/TopCon/Bifacial विकल्प देखें)।
  • इन्वर्टर दक्षता ≥ 97%, विश्वसनीय सर्विस नेटवर्क।
  • हॉट-डिप गैल्वनाइज़्ड/एल्यूमिनियम स्ट्रक्चर; सही टिल्ट/ओरिएंटेशन।
  • UV-रेटेड, उपयुक्त साइज के केबल; केबल मैनेजमेंट साफ-सुथरा।
  • MCB/MCCB, SPD, आइसोलेटर—सही स्पेसिफिकेशन के साथ।
  • कम से कम 3 स्वतंत्र अर्थिंग—LA, इन्वर्टर, स्ट्रक्चर।
  • इंस्टॉलर अधिकृत/अनुभवी हो; कमीशनिंग डॉक्युमेंटेशन व ऐप एक्सेस लें।
  • AMC (कम से कम 5 वर्ष) और वारंटी कार्ड/इनवॉइस सुरक्षित रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ऑन-ग्रिड सिस्टम बिजली कट में काम करेगा?

सामान्यतः नहीं। सुरक्षा कारणों से ग्रिड फेल होने पर इन्वर्टर सप्लाई बंद कर देता है (आइलैंडिंग प्रोटेक्शन)। क्या मैं बाद में बैटरी जोड़ सकता/सकती हूँ?

हाइब्रिड इन्वर्टर चुनने पर भविष्य में बैटरी जोड़ी जा सकती है; सामान्य ऑन-ग्रिड में नहीं। सब्सिडी कैसे मिलेगी?

राज्य/केंद्र की पोर्टल-आधारित प्रक्रिया होती है। अधिकृत वेंडर से आवेदन करें; शर्तें/राशि क्षेत्रानुसार बदलती हैं।

निष्कर्ष

यदि आप लंबे समय का किफायती और सुरक्षित समाधान चाहते हैं, तो ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम बेहतरीन विकल्प है। सही पार्ट्स, गुणवत्तापूर्ण इंस्टॉलेशन और उचित सुरक्षा/अर्थिंग के साथ यह वर्षों तक भरोसेमंद परफॉर्मेंस देता है।


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